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शासकीय सेवा ने संवार दी पहाड़ी कोरवा दंपत्ति की जिंदगी

“सदियों से चली आ रही परम्परा ने हमें आगे बढ़ने ही नहीं दिया. जंगलों में रहकर जीवन-यापन आज के युग में आसान नहीं है. सरकारी नौकरी मिलने के बाद अब परिस्थितियां बहुत बदल गई हैं. पहले परिवार के साथ जंगलों में जाना पड़ता था. जंगल में चार, तेंदू समेत अन्य फल-फूल इकट्ठा करने के साथ बकरी चराना भी पड़ता था. बदलते परिवेश में खुद को स्थापित करना भी एक चुनौती सी रही, लेकिन सरकारी नौकरी में आकर स्वयं को बदलना आसान हो गया. पहले और अब की दिनचर्या में बहुत अंतर है.”

यह कहना है कोरबा विकासखंड अन्तर्गत ग्राम टोंकाभाठा में रहने वाले पहाड़ी कोरवा दम्पति दुखित राम एवं उनकी पत्नी नीराबाई का. विशेष पिछड़ी जनजाति के बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिये जाने के निर्णय के तहत दुखित राम एवं नीरा बाई को स्कूलों में भृत्य की नौकरी मिली. इस नौकरी से उनके जीवन में बेहद सकारात्मक बदलाव आये हैं. जीवनशैली में बदलाव से अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में समर्थ हुए हैं. नौकरी में आने के बाद आर्थिक रूप से सक्षम बनकर दुखितराम एवं उसकी पत्नी नीरा बाई अब बहुत खुश है. राज्य के विशेष पिछड़ी जनजातियों की श्रेणी में आने वाली कोरवा जाति के युवकों को रोजगार देकर समाज की मुख्य धारा में जोड़ने राज्य शासन की पहल का दुखित राम एवं नीराबाई को समय पर लाभ मिला. नीराबाई बताती है कि “कोरवाओं का जीवन बेहद ही संघर्षमय है. रोजी-रोटी के लिए क्या-क्या नहीं करने पड़ते. कई रोज ऐसे भी होते थे कि भूखे रहने की नौबत आती थी। सरकारी नौकरी के लिए जानकारी मांगी गई तो उम्मीदें बढ़ गई और कुछ महीने के भीतर उम्मीद हकीकत में बदल गई. अब तो वह जहां नौकरी करती है, अपने बच्चों भेजकर अच्छे से पढ़ायेगी.” जनता की हर संभव मदद करना ही हमारा प्रयास है, जनता सशक्त होगी तो मजबूत विकास होगा, परस्पर सहयोग से ही प्रदेश के पूर्ण विकास का लक्ष्य पूर्ण होगा.