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आदिवासी

शासकीय सेवा ने संवार दी पहाड़ी कोरवा दंपत्ति की जिंदगी

“सदियों से चली आ रही परम्परा ने हमें आगे बढ़ने ही नहीं दिया. जंगलों में रहकर जीवन-यापन आज के युग में आसान नहीं है.

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शासन से मिली रेडियो से सुदूर गांव की पहाड़ी कोरवा भी सुन पाती हैं रमन के गोठ

कोरबा शहर से लगभग 100 किलोमीटर दूर माटीमाड़ा की पहाड़ी कोरवा बिफन धुरमुनी का पूरा दिन अपने पारा में या फिर आसपास के घने जंगल में गुजरता है

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