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नये कदम- नई उपलब्धियां
 
नये जिलों का गठन -स्वतंत्रता दिवस 2011 की सौगात राज्य में नौ नये जिलों का गठन। सुकमा, कोण्ड्रगांव, गरियाबंद, बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा, बलरामपुर, सूरजपुर और मुंगेली। ये नये जिले जनवरी 2012 से अस्तित्व में आ गये है। इन जिलों में कलेक्टोरेट स्थापना के लिए प्रथम अनुपूरक बजट में 765 नये पद स्वीकृत और 12 करोड़ रूपए का प्रावधान। प्रत्येक नये जिले के लिए 85 पद मंजूर। इन नौ नये जिलों को मिलाकर राज्य में वर्ष 2007 से अब तक 11 नये जिलों का गठन। वर्ष 2007 में बीजापुर और नारायणपुर को जिला बनाया गया। अब छत्तीसगढ़ में जिलों की संख्या 27 हो गई है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 -
आम जनता को सरकारी सेवाएं समय-सीमा में मिलेंगी। जनता के आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण होगा। विधानसभा के बीते मानसून सत्र में सर्वानुमति से विधेयक पारित।

कृषक जीवन ज्योति योजना- किसानों को पांच हार्स पावर तक सिंचाई पम्पों के लिए सालाना छह हजार यूनिट बिजली निःशुल्क दी जा रही है। खाद और बीज की पर्याप्त व्यवस्था की गयी है।

माह जनवरी 2008 से देश का पहला विद्युत कटौती मुक्त राज्य।

चावल उत्पादन के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार- छ्त्तीसगढ़ को मिला वर्ष 2010-11 के लिए सर्वाधिक चावल उत्पादक राज्य का पुरस्कार। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नई दिल्ली में 16 जुलाई 2011 को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को ‘कृषि कर्मण’ पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार स्वरुप प्रशस्ति पत्र और एक करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की।
 
बिजली के क्षेत्र में शानदार कामयाबी -
जनवरी 2008 से राज्य में बिजली कटौती खत्म। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चैबीसों घंटे लगातार बिजली आपूर्ति करने वाला पहला राज्य छ्त्तीसगढ़। हमारे यहां विगत दस वर्षों में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत में 500 प्रतिशत वृध्दि दर्ज की गई है। वर्ष 2009-10 में राज्य में प्रति व्यक्ति विद्युत खपत 1547 यूनिट दर्ज की गयी। लोकसभा में केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री के. वेणुगोपाल द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से विभिन्न राज्यों में बिजली की खपत की ताजा तस्वीर स्पष्ट हुई है। गोवा 2263 यूनिट के साथ पहले स्थान पर, गुजरात 1615 यूनिट के साथ दूसरे स्थान पर और छ्त्तीसगढ़ 1547 यूनिट प्रति व्यक्ति विद्युत खपत के साथ तीसरे स्थान पर है। किसानों को पांच हार्सपावर तक सिंचाई पम्पों के लिए सालाना छह हजार यूनिट बिजली निःशुल्क। राज्य में सिंचाई पम्पों के विद्युतीकरण को शानदार सफलता। राज्य निर्माण से पहले छत्तीसगढ़ में विद्युतीकृत सिंचाई पम्पों की संख्या केवल 72 हजार के आस-पास थी, जबकि आज यह संख्या दो लाख 67 हजार को भी पार कर गई है।
शराब बंदी के लिए ठोस पहल -
राज्य में चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 में शराब बंदी के प्रथम चरण में एक अप्रैल 2011 से दो हजार की जनसंख्या वाले गांवों की लगभग ढाई सौ दुकाने बंद करने का फैसला। भारत माता वाहिनियों का गठन। व्यसन मुक्त स्वस्थ छत्तीसगढ़ निर्माण का लक्ष्य।

अटल विहार योजना -
विकासखण्डों में एक लाख मकान बनाने का लक्ष्य। छत्तीसगढ़ में आवास की कमी को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अटल योजना का शुभारंभ किया गया जिसके अंतर्गत अगले तीन वर्षों में एक लाख मकान बनाने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री सड़क योजना -
मुख्यमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की उन सड़कों का निर्माण है जो कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत नहीं बनी है। इस योजना हेतु सरकार द्वारा लगभग 2000 करोड़ का प्रावधान रखा गया, जिसमें पूरे प्रदेश में कुल 4000 किलोमीटर सड़क निर्माण प्रस्तावित है।
 
सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में छ्त्तीसगढ़ की विकास दर वर्ष 2009-10 में 11.49 प्रतिशत तक पहुंची, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। इस दौरान गुजरात में 10.53 प्रतिशत, उत्तराखंड में 9.41 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 8.59 प्रतिशत, उड़ीसा में 8.35 प्रतिशत और बिहार में 4.72 प्रतिशत की विकास दर रिकार्ड की गयी। छ्त्तीसगढ़ में विगत पांच वर्ष में औसत विकास दर 10.9 प्रतिशत दर्ज की गयी, जबकि अन्य राज्यों की औसत विकास दर 7.44 प्रतिशत पायी गयी। (केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय, नई दिल्ली की रिपोर्ट अगस्त 2010)।

बजट का आकार-
चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 के लिए प्रथम अनुपूरक में 1653 करोड़ रूपए का प्रावधान। इसे मिलाकर छत्तीसगढ़ सरकार का इस वर्ष के बजट का आकार 34 हजार 131 करोड़ रूपए तक पहुंच गया है।
बेहतर वित्तीय प्रबंधन-
बारहवें वित्त आयोग की अवधि में बेहतर वित्तीय प्रबंधन के मामले में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक लम्बी छलांग लगाई है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष 2009-10 में छत्तीसगढ़ का विकासात्मक व्यय कुल व्यय के प्रतिशत के रूप में 76.53 प्रतिशत रहा है, जो देश के पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर सामान्य श्रेणी के राज्यों में सर्वाधिक है। इसी रिपोर्ट के अनुसार छ्त्तीसगढ़ में सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में राज्य का प्रति व्यक्ति आर्थिक व्यय तथा सामाजिक क्षेत्र का व्यय राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी अधिक है। इस अवधि में छ्त्तीसगढ़ ने प्रति व्यक्ति आर्थिक व्यय औसतन 1858 रूपए व्यय किया है, जबकि राष्ट्रीय औसत 1468 रूपए रहा। सामाजिक क्षेत्र में इस दौरान छ्त्तीसगढ़ में प्रति व्यक्ति तीन हजार 371 रूपए खर्च किए, जबकि राष्ट्रीय औसत प्रति व्यक्ति दो हजार 718 रूपए का था।
 
मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना-
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दस हजार 547 राशन दुकानों से लगभग 34 लाख से अधिक गरीब परिवारों को सिर्फ एक रूपए और दो रूपए किलो में हर महीने 35 किलो अनाज और दो किलो निःशुल्क नमक।

बस्तर के गरीबों को चना वितरण - श्री नितिन गडकरी द्वारा 29 मई 2011 को बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर से बस्तर संभाग के गरीबी रेखा श्रेणी के लगभग साढ़े चार लाख परिवारों को प्रति माह पांच रूपए में एक किलो चना वितरण योजना का शुभारंभ किया गया।

ए.पी.एल. परिवारों को भी सस्ता अनाज:- जुलाई 2010 से प्रत्येक ए.पी.एल परिवार को 35 किलो सस्ता अनाज मिलना शुरू, जिसमें 15 किलो अरवा चावलए पांच किलो उसना चावल और 15 किलो गेहूं शामिल। ए.पी.एल. परिवारों को चावल तेरह रूपए और गेहूं दस रूपए रूपए किलो की दर से।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी केन्द्र सरकार को छ्त्तीसगढ़ और गुजरात की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कम्प्यूटरीकरण का उल्लेख करते हुए इसे देष के अन्य राज्यों में एक माँडल के रूप में अपनाने की सलाह दी है।

किसानों के लिए -
सिर्फ तीन प्रतिशत ब्याज पर खेती के लिए ऋण सुविधा देने वाला पहला राज्य है छ्त्तीसगढ़। यह ऋण सुविधा किसान क्रेडिट कार्ड के आधार पर 60 प्रतिशत नकद और 40 प्रतिशत वस्तु के रूप में दी जा रही है। किसानों को पांच हार्स पावर तक सिंचाई पम्पों के लिए सालाना छह हजार यूनिट बिजली निःशुल्क।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी - वर्ष 2010-11 में किसानों से 51 लाख मी. टन धान खरीदा गया और उन्हें लगभग पांच हजार करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। वर्ष 2009-10 में किसानों से 44 लाख मी. टन धान खरीदा गया और उन्हें 47 सौ करोड़ रूपए का भुगतान किया। यह देश के किसी भी राज्य की तुलना में सर्वाधिक है।
 
बीज उत्पादन में वृध्दि -
किसानों में बढ़ी जागरूकता से विगत छः वर्षों र्र्में आधार एवं प्रमाणित बीज उत्पादन में 874 प्रतिशत तथा वितरण में 514 प्रतिशत की वृध्दि हुई है।

फसल बीमा -
राज्य के 14 जिलों की 51 तहसीलों में किसानों को राष्ट्रीय कृषि बीमा के तहत गत खरीफ की क्षतिपूर्ति के रूप में लगभग 124 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा रहा है।

बढ़ती सिंचाई सुविधाएं:-
पिछले करीब छह साल में राज्य में तीन लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का निर्माण किया गया है। हमारी निर्मित सिंचाई क्षमता 23 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई है। इस वर्ष 75 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित करने का लक्ष्य है।