डॉ. रमन
डॉ. रमन सिंह से मिलिए तो एक सहज आत्मीय मुस्कान आपका स्वागत करती है । वह ओढ़ी हुई नही, अंतस से उपजी हुई मुस्कान होती है।>ताजगी में नहाई हुई, विन्रमता में डूबी हुई और करूणा से महकी हुई यह मुस्कान उनका स्थाईयी भाव है। यह मुस्कान छत्तीसगढ़ के सवा दो करोड़ निवासियों में एक विश्वा‍स जागृत करती है । उनमें भरोसा पैदा करती है।

भविष्य के प्रति आशा उत्पन्न करती है। वर्तमान की आंखों में आत्मविश्वास का संचार करती है। आज जब देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ को प्रखरता की उभरती हुई एक संभावना के रूप में देखा जा रहा है तो इस विकासशील राज्य के जनता-जनार्दन को अपने प्रथम निर्वाचित मुख्यखमंत्री डॉ. रमन‍ सिंह पर गर्व होता है।
प्रदेश के बालवृद्ध नर-नारियों का यही गर्व डॉ. रमन को मुख्य मंत्री के ओहदे से निर्लिप्त रहते हुए संघर्ष तथा चुनौतियों के धरातल पर खड़ा करता है । छत्तीसगढ़ के समग्र विकास और लोक कल्याण के संकल्पि को सुदृढ् करता है। प्रतिदिन सत्रह-अट्ठारह घंटे निर्बाध काम करने की जिजीविषा देता है । डॉ. रमन‍ का संकल्पत है कि छत्तीसगढ़ के बारे में बुने गये ''अमीर धरती के गरीब लोग'' के मिथक को तोडा जाये। नया संबोधन रचा जाये ''संपन्न धरती के संपन्न और संभ्रांत लोग।''
यही संकल्प डॉ. रमन सिंह को प्रदेश के लोगों के बेहतरी के लिए हर संभव उपाय करने का प्रेरित करता रहता है। चाहे आर्थिक दृष्टि से कमजारे प्रदेश के 34 लाख परिवारों के लिए प्रतिमाह 3 रूपयें किलो की दर से चावल की आपूर्ति हो अथवा कुपोषण के निवारण की अनेक योजनांए, डॉ. रमन सिंह समर्पण भाव से उन्हें संपन्न करने के व्यावहारिक उपायों को क्रियान्वित कराने में जुटे रहते है। छत्तीसगढ़ के जमीनी यथार्थ को जानने के कारण वे हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को गतिशील करने का यत्न करते हैं। एक छोटा सा उदाहरण है स्कूली बच्चियों को निःशुल्क सायकिल प्रदान करने का। एक अदद सायकिल किसी बच्ची के जीवन में कितनी गति ला सकती है, इसका आभास उसी को हो सकता है जो उनके बीच रहा हो। यदि उन्होंने छत्तीसगढ़ में प्रशासन का मूल मंत्र “गांव, गरीब और किसान का समग्र विकास” बनाया है तो उसका बुनियादी कारण यही है कि वे उनके दुख-दर्द को समझते है। उनकी इच्छाओं-आकांक्षाओं को भी जानते है।