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स्वास्थ्य
राज्य निर्माण के पश्चात प्रदेश में जिला चिकित्सालयों की संख्या 7 से बढ़कर 17 हो गई है। दो जिला चिकित्सालयों की संख्या 7 से बढ़कर 17 हो गई है । दो जिला चिकित्सालयों को आई.एस.ओ. 9001-2000 मानक प्राप्त हो गया है।
विकासखंड स्तर पर संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का 6 शैय्या से 30 शैय्या में उन्नयन किया गया है । 144 संस्थाओं को सामुदायिक स्वास्थय केन्द्रो का दर्जा दिया गया है । प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की संख्या 512 से बढ़ाकर 715 एवं उपस्वास्थ्य केन्द्र की संख्या 3818 से बढ़कर 4776 की गई है जो लगभग राष्ट्रीय औसत के बराबर है ।

24x7 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र -प्रदेश में 24 घंटे आवश्यक प्रसूति सेवाओं की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 354 चयनित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का सुदृढीकरण किया जा रहा है । इन चयनित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 24 घंटे आवश्यक प्रसूति सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु 213 स्टाफ नर्स की संविदा नियुक्ति तथा 846 स्टाफ नर्स की भर्ती की जा रही है । सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो में चिकित्सक की उपलब्धता हेतु एक-एक ग्रामीण चिकित्सा सहायक की नियुक्ति की गई है।
पोषण पुर्नवास केन्द्र -कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल एवं उपचार के लिए 15 जिला चिकित्सालयों एवं 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में पोषण पुर्नवास केन्द्र प्रारंभ करने हेतु आवश्यक व्यवस्था की गई है।

फिक्स डे सर्विसेस -प्रदेश के 715 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो में महिलाओं में प्रजनन तंत्र संक्रमण एवं यौन जनित बीमारियों के उपचार हेतु महिला चिकित्सक तथा प्रयोगशाला तकनीशियन की सेवाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु ‘महतारी लइका स्वास्थ्य दिवस‘ के नाम से कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।
अधोसंरचना
स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण हेतु 17 जिला चिकित्सालयों में से 15 जिला चिकित्सालयों के अपने भवन हैं तथा रायपुर जिला चिकित्सालय के भी भवन निर्माण की स्वीकृति प्राप्त है। 144 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में से 354 संस्थाओं के भवन है तथा 304 भवन स्वीकृत होकर निर्माणाधीन है । 4774 उपस्वास्थ्य केन्द्रों में से 2019 संस्थाओं में शासकीय भवन हे तथा 1564 केन्द्रो के भवन निर्माणाधीन है । वर्ष 2010-11 के बजट में 5 सामुदायिक केन्द्र, 57 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 100 उपस्वास्थ्य केन्द्र के भवनों का निर्माण प्रस्तावित है ।
 
मानव संसाधन
स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणात्मक वृद्धि के लिये विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदों की संख्या 247 से बढ़ाकर 833 की गई, चिकित्सा अधिकारियों की संख्या 1455 से बढ़ाकर 2365 की गई है एवं राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत चिकित्सकीय कार्य हेतु 833 ग्रामीण चिकित्सा सहायक एवं 213 स्टाफ नर्स तथा विभिन्न स्तर पर प्रबंधन कार्य के लिये राज्य स्तर पर 37, जिला स्तर पर 84 तथा विकासखंड एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 550 अधिकारियों/ कर्मचारियों की संविदा आधार पर नियुक्ति की गई है ।
 
अभिनव जन कल्याणकारी योजनाऐं
मुख्यमंत्री बाल हृदय रोग से पीडि़त 15 वर्ष उम्र तक के बच्चों को असमय जानलेवा बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए इस योजना से एक सार्थक पहल की गई है। पूरे भारत वर्ष में यह योजना केवल छत्तीसगढ़ में ही संचालित है। इस योजना के तहत अब तक 1261 बच्चों का सफल आपरेशन किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना
इस योजना के अन्तर्गत मूक बधिर बच्चों में काक्लियर इम्पलांट के लिय राज्य सरकार द्वारा गरीबील रेखा श्रेणी के बच्चों को 6 लाख रूपये और सामान्य बच्चों को 4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी जाती हैं। इस योजना के तहत तीन माहों में 20 बच्चों का काक्लियर इम्प्लांट किया जा चुका है।
 
संजीवनी सहायता कोष
बी.पी.एल. परिवार के हितग्राहियों को 13 चिन्हित बीमारियों के उपचार के लिये, जिसमें हृदय रोग जैसी प्रमुख बीमारी भी शामिल है, इस योजना के तहत आर्थिक मदद छत्तीसगढ़ शासन द्वारा की जाती है।
 
छत्तीसगढ़ रूरल मेडिकल कोर योजना
छत्तीसगढ़ रूरल मेडिकल कोर योजना के अन्तर्गत प्रदेश के चिन्हांकित कठिन व कठिनतम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत मानव संसाधन के लिए प्रोत्साहन राशि निर्धारित की गई है। इन संस्थाओं में विशेषज्ञ चिकित्सकों, चिकित्सा अधिकारी व स्टाफ नर्स की पदस्थापना हेतु स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत, विभाग से सेवानिवृत्त एवं निजी क्षेत्र के न्यूनतम अर्हताधारी व्यक्तियों की सेवा लेकर इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने एक प्रयास है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना
छत्तीसगढ़ के लगभग 23 लाख बीपीएल परिवारों को स्वास्थ्य बीमा पत्रक प्रदान करने के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना का क्रियान्वयन, केन्द्र एवं राज्य सरकार की भागीदारी से किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 10 लाख 70 हजार हितग्राहियों का स्मार्ट कार्ड बन चवुका है एवं उपचार हेतु शासकीय एवं निजी 316 अस्पतालों का पंजीयन कर लगभग 20 हजार हितग्रहितों के उपचार पर 9 करोड़ 14 लाख रू. का भुगतानर किया जा चुका है । इस योजना में भी छत्तीसगढ़ देश में अव्वल है।
 
छत्तीसगढ़ मेडिकल कोर योजना
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सक, विशेषज्ञ चिकित्सक, ग्रामीण चिकित्सा सहायक एवं स्टाफ नर्स को प्रतिमाह निर्धारित प्रोत्साहन राशि निर्धारित कर चिकित्सकीय सुविधा कर चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित कराया गया है।
 
ग्रामीण चिकित्सा सहायक की नियुक्ति
मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने तथा चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए प्रदेश शासन द्वारा तीन वर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रारंभ कर प्रशिक्षण पूर्ण किए 859 लोगों को ग्रामीण चिकित्सा सहायक के पद पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नियुक्ति दी गई है।
संजीवनी एक्सप्रेस
Emergency Management Response System(108 Ambulance Services ) राज्य में ‘‘आपातकालीन चिकित्सा त्वरित एम्बुलेंस सेवा’’ उपलब्ध कराए जाने हेतु अनुबंध संपन्न किया जा चुका है, 1 नवंबर 2010 से 38 एम्बुलेंस के साथ यह सेवा प्रारंभ किया जाना प्रक्रिया में है। प्रदेश में कुल 170 वाहनों के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी । टोल फ्री नं. 108 पर कॉल करने पर 30 मिनट के अंदर वाहन सहित मरीज को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी ।
 
24x7 प्राथमिक स्वास्थ्य केंन्द्र
प्रदेश के 721 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो में से 254 का चयन कर संविदा आधार पर स्टाफ नर्स की पदस्थापना कर 24 घंटे आपातकालीन एवं प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया गया है।
 
146 अतिरिक्त एम्बुलेंस
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध एम्बुलेंस के अतिरिक्त यूरोपियन राज्य साझेदारी कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक विकासखंड में एक के मान से सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंन्द्रों केा 146 एम्बुलेंस वर्ष 2010 में उपलब्ध कराई गई है जिससे प्रसव कालीन माताओं को गंभीर अवस्था में उच्च संस्थाओं में संदर्भित किया जा सके ।